
‘जलवायु परिवर्तन’ (Climate Change) और ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ (Global Warming) को अक्सर एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल कर लिया जाता है, लेकिन ये दोनों एक ही नहीं हैं. सिक्ता देव बता रही हैं – ये क्या हैं, कैसे अलग हैं, और यह भी समझा रही हैं कि कैसे ये दोनों एक दूसरे से जुड़े हैं. रिसर्च और स्क्रिप्ट: अनुभा भोंसले और पल्लवी प्रसाद.
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#ThereIsNoPlanetB #ClimateAction #Newsworthy #ClimateChange #ClimateExplainers
source
Thanks mam aapka samjhaya mujhe bhut achha lga Aaj pahli bar aapka class li aur bhut achha lga
Thankyou so much mam
Very nice explanation ma'am
Thank you thank you very much
मैडम इसके बारे में आप लोग मीडिया में जोर से आवाज उठाइए
Aplok malum hai toh badal sakta hai.
Baat karke kya milega bewakoof people
Your sound pitch is perfect 😊
Over population main reason over population over population 😡😡
This video has a deep meaning 😢
Saare Desho ko milkar kaam Karna hoga nhi toh Puri earth khatm ho jayegi
कोविड 19 महामारी के चलते किए गए लॉकडाउन के दौरान वातावरण में पॉजिटिव बदलाव देखे गए थे। हवा में सस्पेंडेड पार्टिकल्स का स्तर काफी नीचे आ गया था। विजिबिलिटी गुणवत्ता के अनेक किस्से प्रचलित हो गए थे। गर्मी के मौसम में भी बहुत ही कम अवसरों पर डेजर्ट कूलर चलाने की आवश्यकता महसूस हुई थी। मास्क लगाने के चलते श्वास की बीमारियों में गिरावट आई थी। मानव डिस्टर्बेंस रुक जाने के कारण जंगली जानवर भी शहर कस्बों में विचरण करने के भी उदाहरण सोशल मीडिया पर देखने को मिले थे। सार यह है कि जलवायु और ग्लोबल वार्मिंग के बिगड़ने का एकमात्र मुख्य कारण ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्रीज ही हैं।
Very Thankful to you ma’am for very useful information in this video, it will be so helpful for my coming Masters exam of Tourism Impacts (Environmental)🙏
Thank you so much ma'am 😊❤
एक पेड़ चालीस साल में एक टन की कार्बन डाइऑक्साइड सोख सकता है।एक साधारण मनुष्य एक दिन में दो टन कार्बन डाइऑक्साइड अर्थात एक साल में चौबीस टन और चालीस साल में 960 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करता है।पेड़ लगाने से ज्यादा इस बात का प्रचार करें की लोग या तो कम बच्चा करें हो सके तो न करें।और एक तथ्य और जितने सेलिब्रिटी हैं वो प्रतिदिन लगभग एक हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं जिन्हे हमने सर पर चढ़ा रखा है।इनका भी बहिस्कार करें।पेड़ तो लगाए ही
Global warming को counter करने के लिए एक ही सबसे बड़ा तरीका है । हद से ज्यादा बड़े पेड़ लगाया जाए। जितना ज्यादा पृथ्वी पेड़ से ढकी होगी उतना ही ठंडी पृथ्वी रहेगी और वातावरण भी सामान्य रहेगा।
Bhut hi shandar
Bahut accha maam
Acharya Prashant ji Bahut bar bol chuke h aur bol rahe h..
thank you so much❤❤❤
You genius
((((न तु वैश्विकतापः)))))) (((पृथिव्याः सूर्यं परितः कक्षा नष्टा, असन्तुलितं च मनुष्यैः)))
वैश्विकतापः पृथिव्याः अन्तःस्थस्य तापनम् अस्ति ग्रीष्मकाले कस्मिन्चित् क्षेत्रे हिमपातः वा अश्मपातः वा न भविष्यति, ऋतुः अपि न बाधितः भविष्यति । परन्तु यदा पृथिवी सूर्यस्य समीपे भविष्यति तदा आर्कटिकवृत्तं ग्रीष्मकाले द्रवति, येन -५० डिग्री सेल्सियसस्य शीतलवायुः निम्नमार्गेण उष्णकटिबंधेषु प्रवहति, गमनसमये हिमपातः च दृश्यते, परन्तु तत् न भवेत् तदनन्तरं न्यूनतापमानवायुप्रवाहः नास्ति इति कारणतः । एतत् वैश्विकतापवत् सरलं नास्ति एतत् मनुष्याणां पृथिव्याः सूर्यस्य च गतिं नाशयति इति विषयः अस्ति यत् अन्तरिक्षविकासे अस्माभिः विचारणीयम् बलेन पृथिव्याः परिभ्रमणस्य गतिः परिवर्तते । यदि वयं तस्य विचारं न कुर्मः तर्हि गैरजिम्मेदारिकः विकासः स्यात्, अपि च अग्रिम-पीढीयाः अस्तित्वं सर्वथा न विचारयामः वयं सर्वदा चिन्तयामः यत् वयं तस्य सम्मुखीकरणं कर्तुं न शक्नुमः, करिष्यामः च |. ठोसकन्दुकस्य उपरितनयोः अन्तयोः बृहत् हिमघटयोः भवति यदा मध्ये तापमानं अधिकं भवति तदा कन्दुकस्य उपरितनयोः अन्तयोः हिमघटाः -५० अंशतः -४० अंशपर्यन्तं तापमानं वर्धयितुं शक्नुवन्ति , कन्दुकस्य मध्ये शनैः शनैः तापमानं न्यूनीकरोति चेत् , कन्दुकस्य मध्ये तापमानं अति उच्चं न भवेत् इति कृत्वा उपरि अधः हिमघटकाः सन्ति यदा कन्दुकस्य मध्ये यदा तापमानं वर्धते तदा कन्दुकस्य मध्ये तापः अपि प्रत्यक्षतया वर्धते, उपरितनयोः अन्तयोः अपि प्रत्यक्षतया वृद्धिः भविष्यति यदि तापमानं वर्धते तर्हि पृथिवी वस्तुतः समाना एव भवति यदा वनस्पतयः उच्चतापमानस्य सम्मुखीभवन्ति, ते जीवितुं न शक्नुवन्ति स्वाभाविकतया मनुष्याणां कृते अन्नं न उपलब्धं भविष्यति, प्राकृतिकविपदाः च निरन्तरं भविष्यन्ति । इदं यथा कम्पनी केवलं धनं प्राप्तुम् इच्छति परन्तु कचराभिः सह व्यवहारं कर्तुम् न इच्छति तथा च तस्य पुनः प्रयोगं न करोति एतत् गैरजिम्मेदारिकं भवति तथा च केवलं धनं प्राप्तुं इच्छा अतीव गम्भीरा अस्ति तथा च तस्य चिन्ता न करोति अत्यन्तं बहुमूल्यं वातावरणं, पृथिवी।
Thanku mam
Apna lalach kam karna hoga
nice speech
Bahut der ho gayee hai ab kuchh nhi hoga Bak bak kerne se kuchh nhi hoga logon ko khud ko sudharne ki zaroorat hai Murtipuja paap chhorker sachhe Permeshwar ki sharan mein jana atiaawashayak ho gayee hai Insani Gyan bigyan wali bak bak se kuchh nhi hoga
Insaan ka chal charitra ekdam paap se bhr gya hai jiske wazah se aafate aa rhi hai Universal bak bak se kuchh nhi hone wala hai Gandi rajniti ki aabhwa ekdam dishit ho gya hai Ab to mha akal bimari bhookhmri aanewali hai Duniya ke log tarap tarap ker mernewale hai Insani Gyan bigyan kura karkat ho gya hai Bina Permeshwar Yahowa ke kuchh nhi ho sakta hai chahe insaan kuchh bhi kyo na ker le
🎉
😊
Good👍
🎉
🎉🎉
Very nice 👍👍👍
❤❤❤❤❤
Series chalye environment ke paper ka
Mam apne bohot accha samjhaya
सरकार को कड़क नियम बनाने चाहिये
Ha aaya
Thank you so much mam ☺️
😢
Good 🎉🎉🎉
काश हमारे देश के नेता आपस में लड़ने से बेहतर क्लाइमेट चेंज से निपटने के बारे में सोचते तो आज हम इतने गर्मी नही झेलते
सरकार को कानून पास करना होगा
❤ thanks😊
I really like this information 😄❤
Aap samjhate achcha hai😊👍